An Indian Civilizational Perspective

निर्झरिणी की व्यथा

मै अपने अतीत की गहरी खाई
से बाहर आ तो गयी
लेकिन कुछ था जो अन्दर ही अन्दर
मुझे सूखा कर गया था
बारिश की कई बूँदें एक साथ मिलकर भी
उस सूखे के आभास को भिगो न सकी
एहसास दम तोड़ कर उसी खाई में
छूट गया और मेरे हाँथ में सिर्फ
एक लम्बी तन्हाई आ पड़ी
देखने से लगता था मै और भी सशक्त हो गयी थी
सत्य मै जानती थी कि मै
निश्चय ही पाषाण हो गयी थी
उस सूखे का एहसास बस मेरी रूह ही को था
चेहरे पर मेरे कोई शिकन नहीं थी
देखा सभी ने मेरे चेहरे को खूब देखा
जाना उन्होंने मुझको उथले से दायरे में
छूता कोई जो मन को शायद वो देख पाता
रूह में अरसे से जो एक बर्फ सी जमी थी
कोई हवा का झोंका उसको तो छू के जाता
वैसे तो आँधियों की कोई कमी नहीं थी
नज़रें थी खोजती कुछ हलकी सी रौशनी में
कोई कहीं नहीं था बस आस सी लगी थी
अबके बरस जो आये फिर जेठ की दुपहरी
पिघले अगर ये चद्दर जो मुझको ढक गयी थी
तो मै प्रवाह बन कर रस्ता नया चुनूंगी
जिस जिस जगह हो सूखा उस उस जगह बहूंगी
पत्थर पहाड़ जंगल मेरे अधीन होंगे
उन सबको लांघकर ही तुमसे मै जा मिलूंगी
निर्झरिणी की व्यथा को कोई सोचे तो कैसे सोचे
समझे अगर उसे तो सागर ही खूब समझे |

8 Comments
  1. Anonymous says

    Who is throwing my dead body
    Into depth of blue ocean
    Sinking on back with streached arms and legs
    Where am I going to abide there
    Never died like this before
    There is no roof in the ocean
    Where this soul will go and hang?

  2. Anonymous says

    Who is throwing my dead body
    Into depth of blue ocean
    Sinking on back with streached arms and legs
    Where am I going to abide there
    Never died like this before
    There is no roof in the ocean
    Where this soul will go and hang?

  3. Desh says

    “निर्झरिणी की व्यथा को कोई सोचे तो कैसे सोचे
    समझे अगर उसे तो सागर ही खूब समझे |”

    इतनी सुन्दर अभिव्यक्ति कहीं कम ही देखी है | व्यथा तो है … पर व्यथा में एक सहृदयता भी है | गरिमा, आपकी कवितायेँ पद कर हिंदी कवितायों से जैसे फिर प्यार हो उठा है |

  4. Desh says

    “निर्झरिणी की व्यथा को कोई सोचे तो कैसे सोचे
    समझे अगर उसे तो सागर ही खूब समझे |”

    इतनी सुन्दर अभिव्यक्ति कहीं कम ही देखी है | व्यथा तो है … पर व्यथा में एक सहृदयता भी है | गरिमा, आपकी कवितायेँ पद कर हिंदी कवितायों से जैसे फिर प्यार हो उठा है |

  5. garrimaa says

    धन्यवाद देश जी,
    आपका प्रोत्साहन अपने आप मे प्रेरणा से ओत प्रोत है| आपकी नयी वेबसाइट प्रोपेर्टीस की वजह से अब यहाँ जो भी लिखो वह सीधा ट्विट्टर पर ट्वीट भी हो जाता है| यह गुण देखकर मै काफी प्रभावित हुई| आपका बहुत बहुत शुक्रिया कि आपने मेरी रचनाओं को न सिर्फ सराहा है बल्कि उनको सहज अभिव्यक्ति का मौका भी दिया है अपनी ब्लॉग साईट पर| आपके खुद के लेखन की मै दाद देना चाहूंगी| इतनी कुशलता से जो आप ज्ञान को एक मंच पर लाते हैं अपनी रचनाओं के जरिये, वह काफी प्रशाश्नीय है |
    गरिमा

  6. garrimaa says

    Thanks Pramila for this beautiful composition here..I read these lines on facebook too.
    Garrimaa

  7. garrimaa says

    धन्यवाद देश जी,
    आपका प्रोत्साहन अपने आप मे प्रेरणा से ओत प्रोत है| आपकी नयी वेबसाइट प्रोपेर्टीस की वजह से अब यहाँ जो भी लिखो वह सीधा ट्विट्टर पर ट्वीट भी हो जाता है| यह गुण देखकर मै काफी प्रभावित हुई| आपका बहुत बहुत शुक्रिया कि आपने मेरी रचनाओं को न सिर्फ सराहा है बल्कि उनको सहज अभिव्यक्ति का मौका भी दिया है अपनी ब्लॉग साईट पर| आपके खुद के लेखन की मै दाद देना चाहूंगी| इतनी कुशलता से जो आप ज्ञान को एक मंच पर लाते हैं अपनी रचनाओं के जरिये, वह काफी प्रशाश्नीय है |
    गरिमा

  8. garrimaa says

    Thanks Pramila for this beautiful composition here..I read these lines on facebook too.
    Garrimaa

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