An Indian Civilizational Perspective

तेरी गोद ही संपूर्ण सृष्टि हो

माँ आज तू नहीं है यहाँ
जैसे तेरी राख गंगा की हर लहर में
समायी थी.

मैं जानता हूँ माँ ठीक वैसे ही
सृष्टि की हर लहर में तेरी गूँज है.

यह तारों की चमक,
यह पत्तों का हिलना,
पानी का बहना … अविरल.

सब में तेरा ही गान है.

माँ मैं तेरा था, पर अब
मैं तू और तू मैं हैं.
तुझमें इश्वर का विस्तार है
और समुद्र की गहराई.

सोचूं तो नहीं जान सकूँगा,
पर तू थाम ले हाथ तो
मैं तेरी लहरों में बह निकलूंगा

वहां जहाँ कोई मेरा न हो
न मैं किसीका.

जहाँ मैं सब और सब मैं हूँ
तेरी गोद ही संपूर्ण सृष्टि हो.

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3 Comments
  1. Diann21Hickman says

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  2. DD says

    I am yet to come across a tribute so touchy and meaningful …

    Loved it ..every bit!

    – DD

  3. DD says

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